साहित्य एवं पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा, लेखक परिचय, प्रकाशन समाचार तथा अन्य साहित्यिक गतिविधियाँ

masala chai book by divya prakash dubey

दिव्य प्रकाश दुबे की मसाला चाय – पुस्तक समीक्षा

"एक उम्र होती है जब क्लास की खिड़की से बाहर आसमान दूर कहीं जमीन से मिल रहा होता है और हमें लगता है कि शाम को खेलते-खेलते हम ये दूरी तय कर लेंगे. दूरी तय करते-करते जिस दिन हमें पता चलता है कि ये दूरी तय नहीं हो सकती, उसी दिन हम बड़े हो जाते हैं". यह पंक्तियाँ अगर आपको आकर्षित करती है तो दिव्य प्रकाश दुबे की मसाला चाय अवश्य पढ़ें.
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मुद्रित पुस्तकों के बने रहने के 15 प्रमुख कारण (पुस्तक बनाम ईपुस्तक – भाग...

Books vs Ebooks की चर्चा में मुद्रित पुस्तकों के बने रहने के कई कारण गिनाता यह लेख इस तथ्य को प्रबल बनाता है कि मुद्रित पुस्तकों का बाज़ार आगामी कई वर्षो तक (या सदा) बना रहेगा.
kothagoi book by prabhat ranjan

प्रभात रंजन की ‘कोठागोई’ – पुस्तक समीक्षा

‘कोठागोइ’ मुज़फ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान के उन भूले बिसरे फ़नकारों और हस्तियों का एक क्रॉनिकल है जिसे संगीत और कला की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है. पुस्तक साहित्य प्रेमियों को ही नहीं, संगीत प्रेमियों को भी पसंद आएगी जहाँ जनश्रुतियाँ है, दस्तावेज है और संक्षिप्त-जीवनी भी !
mahakavi vidyapati

महाकवि विद्यापति की रचनाओं का काव्य सौंदर्य

मैथिली भाषा का उल्लेख होते ही इसका इतिहास लगभग विद्यापति से ही आरम्भ होता है. यदि मैथिली रचनाकारो की लोकप्रियता की बात की जाय तो इस कतार के शीर्ष मे भी महाकवि विद्यापति ही...
halant by hrishikesh sulabh hindi

हलंत – हृषिकेश सुलभ की पुस्तक

मैंने प्रेमचंद से पहले फणीश्वर नाथ रेणु को पढ़ा और समझा था। स्कूल में शिक्षिका ने जब ‘पंचलैट’ सुनाया (पढ़ाया नहीं), तो बाल मन एक साथ ग्रामीण समाज और हिंदी साहित्य की ओर और...
ishq mein shahar hona

इश्क में शहर होना – रवीश कुमार की पुस्तक

लप्रेक (Laprek) क्या होता है, इसकी बात मैं इस पोस्ट में पहले ही कर चूका हूँ। किस्सागोई के इस नैनो संस्करण को बाज़ार तथा पाठकों ने हाथों-हाथ लिया जिससे मान सकता हूँ कि साल...
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यह लप्रेक (Laprek) है क्या ?

लप्रेक - है क्या यह ? हिंदी जगत में यह सवाल साल के शुरुआत में अच्छा उछला था और लोग अब भी कभी कभार पूछ ही देते हैं। परन्तु इसे जानने समझने से पहले...

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