ऐसा कई बार हुआ है या होता आया है जहाँ किसी समस्या के निवारण हेतु उठाये गए कदम ने मूल समस्या को या तो और भी बढ़ा दिया हो या नयी समस्या ने जन्म ले ली हो जो कल्पित नहीं थी. इसे Law of Unintended Consequences भी कहते हैं. सोच के विपरीत या अलग परिणाम के उदाहरण रोचक हैं तो कुछ भयावह भी. अनपेक्षित परिणाम का यह सिद्धांत प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी यह एक बहुत बड़ा पाठ है.

law of unintended consequences
समस्या – निवारण – घोर समस्या

ऐसा निदान, जिसने समस्या को और विकराल कर दिया

1. सख्त पासवर्ड के नियम जो इसे और असुरक्षित बना देते हैं

strong password
ये डालें, वो डालें, सब डालें और भूल जाएँ !

आपने कईं वेबसाइट पर गौर किया होगा कि पासवर्ड वाले स्थान पर मिश्रित केस के शब्द, विशेष अक्षर (जैसे की %#$#@), संख्या, पुराना पासवर्ड का कोई दोहराव नहीं, नियमित अंतराल पर इसका बदलाव इत्यादी जैसे अनिवार्य नियम लगाये जाते हैं. यह तो वैसे एक अच्छे पासवर्ड के लिए जरूरी भी है. परन्तु समस्या यह आ गयी की उपयोगकर्ता को इस तरह से नित नए पासवर्ड याद रखना मुश्किल हो गया. समाधान के तौर पर उन्होंने इसे कई और लिख कर रखना शुरू कर दिया जो मूल उद्देश्य को ही चौपट कर देता है. सुरक्षा के नाम पर इस कदम ने इसे और भी असुरक्षित बना दिया.

2. पहले से भी ज्यादा वाहन

कोलंबिया में जाम एक आम विषय हुआ करता था. इसका मूल कारण सड़कों पर अधिकाधिक संख्या में कारों का होना था. प्रशाशन ने इसे नियंत्रित करने के लिए एक नयी तरकीब सोची. उदाहरण तौर पर उन्होंने सप्ताह के चिन्हित दिनों पर उन्ही कारों के परिचालन की अनुमति दी जिसके नंबर प्लेट पर 1,2,3 … हो. और शेष दिनों में शेष संख्या वाले नंबर प्लेट.

इस नए कानून का लक्ष्य सड़क पर कारों की संख्या को लगभग आधा करना था.

परन्तु लोगों ने इसका भी एक सरल उपाय निकाल लिया. उन्होंने दूसरी कार खरीदनी शुरू कर दी जिसका नंबर में वह संख्या हो जिससे वह अन्य दिन भी निकल सकें.

जाम की समस्या तो यथास्थिति बनी रही (या संभवतः पहले से भी ज्यादा) और कारों की संख्या भी लगभग दोगुनी हो गयी !

पुस्तक स्रोत : Freakonomics

3. भारत और आरक्षण

यह एक विवादस्पद विषय है.

दलितों तथा पिछड़ी जाती के उत्थान के लिए बनायीं गयी इस नीति ने उन्हें एक कालखण्ड तक तो अवश्य लाभ पहुँचाया, परन्तु इसने अन्य सामाजिक और राजनीतिक कुरीतियों को जन्म दे दिया. कुछ जातियाँ इसका लाभ लेने के लिए जाति-सूचि में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आन्दोलन करने लगी जो समय समय पर बंद-दंगे करवाती है. जो जाति शामिल हो गयी उन्होंने उधर भीड़ बढ़ा दी. राजनेता इसे वोट बैंक के रूप में देखने लग गए और ज्यादा वोट जातिगत आधार पर पड़ने लगे जिसने राष्ट्र की विकास गति अवरुद्ध की. कार्यस्थल पर सामान्य श्रेणी के लोग उन्हें और हेय दृष्टि से देखने लगे जो फिर से राष्ट्र के अखंडता और संप्रभुता के लिए लिए अभिशाप है.

4. जॉनी वॉकर व्हिस्की – जब दाम के घटने से विक्रय भी घट गया

जॉनी वॉकर, शराब के क्षेत्र में यह सबसे अग्रणी ब्रांड है. एक बार जापान में जारी किये गए स्कॉच व्हिस्की की सूचि में Johnnie Walker Black Label सबसे ऊँचे पायदान पर था. विक्रय को और बढ़ाने के लिए उन्होंने इसके दाम में थोड़ी गिरावट ला दी.

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उनके सोच के विपरीत यह व्हिस्की पहले से कम बिकने लगी.

गिरते व्यापर का जब विश्लेषण किया गया तो पाया गया कि कथित सूचि भिन्न-भिन्न श्रेणियों की बनायी गयी थी जिसमे ‘दाम’ भी एक मानक सूचि थी. जॉनी वॉकर दाम वाली सूचि में शीर्षस्थ पर हुआ करती. चूँकि उनके दाम में गिरावट आ गयी थी तो वह निचले पायदान पर चला गया.

जहाँ लोग महँगी शराब को प्रतिष्ठा एवं सामाजिक हैसियत का प्रतीक मानते, वहाँ ‘सस्ती शराब’ कमपसंद बन गयी. बाँकी अंदाजा आप खुद लगा लें !

हाँ, दाम वापस बढ़ाने पर उनका विक्रय पूर्व स्थिति में आ गया.

5. टाटा नैनो, सस्ती कार और विफल प्रयास

tata nano car
लखटकिया नाम महंगा पड़ा

टाटा नैनो का प्रमोचन को दुनियाँ की सबसे सस्ती कार बताकर की गयी. यह ‘सबसे सस्ता’ शब्द ही भविष्य में उसके फ्लॉप होने का कारण बना.

सामान्य तौर पर भारत में लोग कार को ऐश्वर्य और वैभव का प्रतीक मानते हैं. टाटा नैनो को लेकर एक पूर्वाग्रह पनप गया कि इसे तो नीचे तबके वाले लोग भी ले सकते हैं. इस विचार से ग्रस्त एक सस्ती कार उनके स्टेटस सिंबल में कोई बढ़ावा नहीं लाती. दूसरी ओर हम जब भी कुछ नया और विशेष लेते हैं तो देखते हैं कि अन्य कौन-कौन इसे ले सकता है. चूँकि इसे कोई भी खरीद सकता था, सो लोगों ने ‘लखटकिया’ से किनारा कर लिया.

कोई आश्चर्य नहीं कि भारतीय बाज़ार और अर्थशास्त्र के लिए यह सबसे बड़ा पाठ सिद्ध हुआ.

स्रोत : टाटा नैनो को सबसे सस्ती कार बताना हमारी भूल थी – रतन टाटा

6. कोब्रा इफ़ेक्ट – जब दिल्ली में साँपों की संख्या और बढ़ गयी

यह ब्रिटिश राज के समय की बात है. ब्रिटिश सरकार उस समय दिल्ली के आस पास नागों की संख्या को लेकर थोड़ी चिंतित थी. उन्होंने बाद में ऐलान करवाया कि मरे हुए साँप लाने पर लोगों को आर्थिक इनाम दिया जाएगा. शुरू में तो सब ठीक रहा और सफल भी क्यूँकी इनाम के लिए अधिकाधिक साँप मारकर लाये गये. परन्तु लोगों ने बाद में इस इनामी व्यवस्था का दुरूपयोग शुरू कर दिया.

अर्थप्राप्ति की लालच में उन्होंने खुद ही साँप पालने शुरू कर दिये !

जब प्रशाशन को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने इस योजना पर विराम लगा दिया. अब जिन्होंने नाग पाल रखे थें उनके लिए वह व्यर्थ हो गया और मुक्त कर दिये गये.

परिणामस्वरुप नागों की संख्या पहले से भी अधिक हो गयी !

आगे चलकर इसी घटना पर आधारित ‘Cobra Effect’ नाम की एक परिभाषा बनी जिसका इस्तेमाल वहाँ किया जाता है जहाँ निवारण ने समस्या को और भी विकराल कर दिया हो.

स्रोत : कोब्रा इफ़ेक्ट (विकिपीडिया)

7. ट्रैफिक लाइट पर लगा टाइमर – जल्दबाज लोगों के लिए अभिशाप

traffic light counter
लाल होने तक पार !

सुव्यवस्थित यातायात के लिए ट्रैफिक लाइट एक बहुत उपयोगी वस्तु सिद्ध हुई है. और इसी के साथ लगा टाइमर भी जो आपको बत्ती के बदलने का सामयिक संकेत देता है. जो लोग अपना वाहन खड़ी कर बत्ती के हरे होने की प्रतीक्षा करते हैं उनके लिए तो अच्छा है क्यूंकि बचके हुए समय के अनुसार इंजन बंद या चालू कर सकते हैं. परन्तु कई जगहों पर दुर्घटना इसलिए भी बढ़ गयी क्योंकि लोगो नें बत्ती को हरा से लाल होने के कम अंतराल को देखकर वाहन और तेज कर देते हैं ताकि लाल-बत्ती होने से पहले निकल जाये. कुछ-कुछ घड़ी के टिक-टिकी जैसा जो घर में तो ठीक है परन्तु सड़क पर नहीं.

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जल्दबाजी के इस चक्कर में कई बार दुर्घटना हो ही जाती है जिसका मूल कारण टाइमर होता है.

8. अश्लील वेबसाइट पर लगा प्रतिबंध

भारतीय सरकार इन्टरनेट पर अश्लीलता कम करने या इसके रोकथाम के लिए सैकड़ों पोर्न-वेबसाइट पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया.

कुल 857 अश्लील वेबसाइट को ब्लॉक करने की कवायद हुई जिसकी मीडिया ने लिस्ट भी जारी कर दी.

जब सोशल मीडिया से लेकर सभी जगहों पर इसकी पुरजोर आलोचना हुई तो प्रतिबंध हटा लिया गया.

अब लोगों के पास सैकड़ों वेबसाइट की लिस्ट आ गयी – वह भी बिना मेहनत एक जगह. धन्यवाद सरकार बहादुर !

9. वोडाफ़ोन का Zoozoo जो खुद ब्रांड से आगे निकलने लगा

वोडाफ़ोन के ज़ूज़ू (ZooZoo) से आप सभी परिचित होंगे. अभिग्रहण के बाद जब Hutch से Vodafone हुआ तो री-ब्रांडिंग के लिए एक ऐसे विज्ञापन की आवश्यकता थी जो प्रभावशाली हो. अपने मूल्य वर्धित सेवा (Value Added Service) के विज्ञापन के लिए उन्होंने एक नए पात्र-चरित्र की रचना की. IPL Season 2 के दौरान आये इस विज्ञापन ने ZooZoo को अत्यंत लोकप्रिय बना दिया.

वह इतना लोकप्रिय हो गया कि उसके नाम से एक अलग बाज़ार ही खड़ा हो गया. ZooZoo खिलौने, ZooZoo स्टीकर, ZooZoo लेबल, कपड़े तथा अन्य उत्पाद.

zoozoo
शीर्ष पर कौन – वोडाफ़ोन या ज़ूज़ू ?

अब समस्या यह आ गयी कि यह पात्र अपने आप में एक ब्रांड बन गया जिससे वोडाफ़ोन को लाभ से ज्यादा हानि हुई. लोगों का ध्यान बजाय इस चीज़ के कि ‘क्या दिखाया जा रहा है’ से ‘कौन दिखा रहा है’ पर बंटने लगा. ग्राहकों में प्रत्याशित वृद्धि न देख कंपनी ने इसे हटा लिया. कुछ समय पश्चात इसे फिर लाया गया, परन्तु सूक्ष्म तौर पर.

विज्ञापन के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कल्पित चरित्र ने ब्रांड को ही अपना ग्रास बना लिया – अति प्रचलित होकर !

10. थॉमस मीज्ले जूनियर – अनपेक्षित परिणाम के शहंशाह !

थॉमस मीज्ले जूनियर के कई खोज अथवा आविष्कार ऐसे रहे जो बाद में चलकर मानवता के लिए खतरा बन गए और एक ने तो खुद उनकी जान ले ली.

thomas midgley junior
विडम्बना का ग्रास

सर्वप्रथम उन्होंने इंजन के आवाज़ कम करने के लिए पेट्रोल में सीसा मिलाया. यह समस्या तो ठीक हो गयी परन्तु एक नयी समस्या ने जन्म ले ली – हानिकारक प्रदूषण और इसका मानव शरीर पर असर. यही कारण है कि सीसा रहित पेट्रोल सपष्ट रूप से आज भी लिखकर बेचा जाता है.

आगे जाकर उन्होंने ठंडा रखने वाले उपकरणों के लिए CFC का इजाद किया. परन्तु बाद में यह भी पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया. हमारे ओजोन परत में छिद्र का सबसे बड़ा कारक और कारण CFC ही था.

अंत में जब वह पोलियो से ग्रसित हुए तो बिस्तर से उठने बैठने हेतु खुद की मदद के लिए पुली (pulley) लगवाई. एक दिन उसी के रस्सी में उलझकर उनकी मृत्यु हो गयी.

आपकी बारी

उद्योग क्रांति, विकास, नयी दवाइयाँ, मॉडर्न यंत्र इत्यादि ने हमारे ज़िन्दगी को तो सरल बनाया परन्तु इनके दुष्प्रभाव या अतिरिक्त असर (साइड इफ़ेक्ट) भी है भी हैं. हालाँकि अनपेक्षित परिणाम का सिद्धांत इनसे थोड़ा भिन्न है.

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Topic Covered : Law of Unintended Consequences Example, Cobra Effect


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