मुंशी प्रेमचंद जैसी विभूतियों की रचनाओं के साथ अब सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बहुतेरे उपलब्ध हैं ! सर्व-सुलभ परन्तु बहुतायत में उपलब्ध होने के पश्चात भी पाठक के समक्ष सबसे बड़ी दुविधा यह आ जाती है कि किस प्रकाशक की कौन सी प्रति उत्कृष्ट है? प्रस्तुत लेख मुंशी प्रेमचंद समग्र के सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध संकलन के सुझाव हेतु है.

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मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का सर्वश्रेष्ठ संकलन

जहाँ तक मुझे ज्ञात है, मुंशी जी की समग्र रचनाएँ (कहानियाँ) चार-पाँच विभिन्न प्रकाशनों द्वारा उपलब्ध है. इनमे सबसे प्रचलित और पुरानी मानसरोवर (8 खण्ड) है जो स्वयं मुंशी प्रेमचंद की देन है. वहीँ लोकभारती प्रकाशन और साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें भी हैं जिनमे लेखक की समग्र कृति (मात्र कहानियाँ) समाहित है.

अब बहुधा प्रश्न यह उठता है कि वह पाठक जिनकी रूचि प्रेमचंद की संपूर्ण रचना लेने की है वह कौन सी प्रति लें ? उपरोक्त संस्करण की अपनी-अपनी विशिष्टताएँ हैं जिसका उल्लेख यहाँ किया जा रहा है जिससे पाठक आप ही चुनाव कर सकेंगे.

मानसरोवर (आठ खण्ड)

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मानसरोवर – सबसे प्रचलित परन्तु उत्तम नहीं

कहानियों की कुल संख्या : 205 से  230
प्रकाशक : कोई एक नहीं
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इसका प्रथम संस्करण मुंशी प्रेमचंद के समय ही अस्तित्व में आया था. मुंशी जी अपनी रचनाओं को पहले विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रेषित करते थें. एक खास संख्या में सभी के प्रकाशन के पश्चात उनका एक संकलन तैयार कर एक सम्पूर्ण पुस्तक का रूप देते थें. यही ‘मानसरोवर’ बनकर पाठकों के सम्मुख आया जिसका शेष खण्ड उनकी मृत्यु के पश्चात प्रकाशित किया गया. परन्तु इस संस्करण की अपनी खूबी-खामी है. खूबी यह कि इसमें लगभग सभी प्रचलित रचनाएँ समाहित है. खामी यह कि प्रेमचंद जैसे मूर्धन्य साहित्यकार की पुस्तक बेहतर छपाई, पन्नों की गुणवत्ता और बेहतर प्रस्तुति के योग्य है जो किसी भी मानसरोवर के प्रकाशक ने अब तक उपलब्ध नहीं करवाई.

अगर आप मात्र कहानियों के कारण इसे लेना चाहेंगे तो यह अवश्य ले सकते हैं, परन्तु आप अगर किसी ऐसी कृति के खोज में हैं जो आपके पुस्तक की अलमारी पर पूरे ठसक से बैठता नज़र आए तो अन्य संकलन की ओर देखें.

प्रेमचंद की सम्पूर्ण कहानियाँ (दो खण्ड)

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मूल्य की दृष्टि से बेहतर विकल्प

कहानियों की कुल संख्या : 222
प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन
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महज़ दो खण्डों में उतनी ही कहानियों को संकलित करने का प्रयास किया गया है जितना मानसरोवर में है. मूल्य के हिसाब से इसकी गुणवत्ता का आकलन अनुचित होगा, परन्तु प्रकाशक इसमें अगर थोड़ा भी सुधार ला पाए तो यह सर्वाधिक खरीदने-बिकने वाला संकलन बन सकता है. पाठक अपनी सुविधानुसार (दरअसल जेब!) सजिल्द या अजिल्द संस्करण ले सकते हैं. चूँकि यह दो खण्डों में आता है, सो कई पाठकों के लिए स्थान की दृष्टि से देखें तो अन्य रचनावलियों से बेहतर है. कहीं आना-जाना भी हुआ तो समग्र या आधी रचनाएँ अपने साथ ढोने की सोच भी सकते हैं.

जेब और जगह – इस संकलन का सबसे बड़ा आकर्षण है.

प्रेमचंद कहानी रचनावली (छः खण्ड)

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प्रेमचंद प्रेमियों के लिए उत्कृष्ट उपहार

साहित्य अकादेमी द्वारा उपलब्ध यह सजिल्द संस्करण संपूर्णता को परिभाषित करता है. कुल छः खण्डों में उपलब्ध यह संस्करण विराट भी है और विशिष्ट भी. पुस्तक का विशेष आकर्षण कमल किशोर गोयनका द्वारा लिखित और सम्पादित भूमिका है जो प्रेमचंद और उनके साहित्यिक तथ्यों से विस्तृत रूप में अवगत कराता है. सभी खण्डों की इन तथ्यपरक भूमिकाओं के योग से खुद एक सातवाँ रोचक तथा ज्ञानवर्धक खण्ड तैयार हो सकता है ! अगर आप मुंशी जी का जीवन तथा साहित्यिक यात्रा पर अपना ज्ञान पैना करना चाहते हैं तो यह एक अवश्य पठनीय कृति है. इस संकलन की दूसरी विशिष्टता यह है कि सभी कहानियों को उनके कालक्रमानुसार संकलित कर प्रकाशित किया गया है (इसके हेतु संपादक ने गहन अन्वेषण और अनुसंधान किया है). इस संकलन की पूर्ण समीक्षा मैंने विस्तृत रूप यहाँ भी लिखी है.

कहानियों की कुल संख्या : 298
प्रकाशक : साहित्य अकादेमी
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अंत में … कौन है सबसे बेहतर विकल्प ?

आप फिर भी दुविधा में हैं तो निम्न सारांश आपकी कुछ सहायता करे :

१. अगर मूल्य बाधा नहीं और आप सम्पूर्ण कृति लेना चाहते हैं तो साहित्य अकादेमी  द्वारा प्रकाशित ‘प्रेमचंद कहानी रचनावली’ लें. यह पठनीय, संग्रहणीय और बहुमूल्य है.

२. उचित मूल्य पर सम्पूर्ण कहानी हेतु लोकभारती प्रकाशन  द्वारा प्रकाशित द्वि-खंडीय ‘प्रेमचंद की सम्पूर्ण कहानियाँ’ पुस्तक योग्य विकल्प है.

३. मानसरोवर अंतिम विकल्प है. उतने ही मूल्य में कुछ और मिलाकर आप साहित्य अकादेमी का संकलन ले सकते हैं या कई गुना सस्ता लोकभारती प्रकाशन की पुस्तक.

विशेष आभार :

अंजान अंकल : पुस्तक मेले साहित्य अकादेमी से आये उन सज्जन को जिन्होंने उस समय मुझमे एक छात्र को देखते हुए विशेष छूट दी थी.
लोकभारती प्रकाशन : मेरे आग्रह पर पुस्तकें उपलब्ध करवाने हेतु.

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